हर कॉलेज अपने को बेस्ट बताता है। ऐसे में कॉलेज का चयन करने से पहले उन्हें कुछ एक पैरामीटर्स पर परख कर देख लें, ताकि आगे चलकर धोखा हुआ महसूस न हो और बेहतर कैरियर के अवसर भी बने रहें। एजुकेशन व कैरियर काउंसलर अनिल सेठी बता रहे हैं सामान्य शिक्षा पद्धति से कोर्स उपलब्ध करा रहे संस्थानों के लिए चेक लिस्ट
संस्थान की मान्यता
कॉलेज या संस्थान विश्वविद्यालय या संस्था से मान्यताप्राप्त होना चाहिए। अगर टेक्निकल शिक्षा का संस्थान है, तो उसे एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त होना आवश्यक है।
प्रिंसिपल और फैकल्टी
जिस कॉलेज में एडमिशन ले रहे हैं, उसका हेड क्वालिफाएड हो। उसके विजन में छात्रों की जानकारी के साथ व्यक्तित्व विकास भी शामिल हो । फैकल्टी मेंबर्स भी अनुभवी व अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठित लोग हों। आजकल प्राइवेट कॉलेजेस में कम उम्र के लोगों को भी लेक्चरर के पद पर नियुक्ति मिल जाती है, ऐसे में उनकी योग्यता का आकलन उनकी जानकारी और अध्यापन के प्रति समर्पण के आधार पर करें।
प्रोफेशनल ट्रेनिंग
आर्ट्स कॉमर्स व साइंस छात्रों के लिए कॉलेज में कुछ अतिरिक्त कोर्स की व्यवस्था होनी चाहिए, जैसे कि इंगलिश स्पीकिंग, फैशन डिजाइनिंग, कंप्यूटर्स, मास कम्युनिकेशन, वेब डिजाइनिंग, फॉरेन लैंग्वेजेस, आर्ट, ट्रैवेल आदि। इस तरह के कोर्सेज आपको पार्ट टाइम जॉब के लिए भी तैयार करते हैं।
एजुकेशन / ट्रैक रिकॉर्ड
यह भी जरूर देख लें कि पिछले कुछ वर्षों में उस संस्थान से मेरिट में कितने छात्रों को स्थान मिला है।
सुविधाएं व अन्य
कॉलेज की बिल्डिंग व संस्थान सभी गतिविधियों का केंद्र होते हैं। हॉस्टल्स, बड़े कमरे, इंटरनेट सुविधा, लैबोरेट्री व लाइब्रेरी आदि के बारे में पता कर लेना चाहिए।
उद्योगों से संबंध और रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट
आज उद्योगों को समझना बहुत जरूरी हो गया है। उद्योगों की मांग को समझने के लिए संस्थान की ओर से गेस्ट फैकल्टी व एक्सपर्ट्स बुलाए जाते हैं। इस तरह छात्र को उद्योग की समझ तो होती ही है, साथ ही उनमें उपस्थित जॉब ऑप्शंस के बारे में भी पता चलता है। बहुत से संस्थान प्रतिष्ठित उद्योगों की रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट सेल से भी टाए-अप कर लेते हैं। इनमें छात्रों को सीनियर लोगों के साथ मिलकर काम करने का मौका मिलता है और अनुभव लाभ भी मिलता है।
प्लेसमेंट सेल
किसी भी संस्थान के लिए यह बहुत ही आवश्यक होता है। यद्यपि कुछ संस्थानों का मैनेजमेंट इसे महत्व नहीं देता है, फिर भी अब अधिकतर संस्थानों में यह सेल बनाए जाने लगे हैं। संस्थान का प्लेसमेंट रिकॉर्ड क्या है, सेल की ओर से छात्र को क्या सहायता दी जाती है आदि जान लेना बहुत जरूरी है।
वर्तमान छात्रों से जानकारी
संस्थान में पढ़ रहे छात्रों से क्लासेस, पढ़ाई के तरीके, कोर्स कंप्लीशन आदि के बारे में जानकारी ले लेना ठीक होता है। पढ़ाई कर चुके छात्रों से भी बात करना फायदेमंद होगा, लेकिन दो साल से अधिक पुराना न हो।
इसके अलावा स्पोर्ट्स व एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज के बारे में भी जानकारी ले लेनी चाहिए।